उनमें तो कभी कड़वी बात तक न हुई in sort story

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                                                 उनमें तो कभी कड़वी बात तक न हुई ।



 उनमें तो कभी कड़वी बात तक न हुई । थी । मरियम ने हमेशा मुर्तज़ा की बात सुनी थी और हमेशा उसकी बात मानी थी । फिर अब ठन्डे लहजे में मुंह पर बात मारने वाले अन्दाज़ वह कैसे बर्दाश्त कर लेता । उसे मरियम पर बहुत गुस्सा था । वैसे भी अब उसे सोचने की ज़रूरत कम ही मिलती थी । आफ़िस के बाद जिम चला जाता ।





 अब उसने वहां की मेम्बरशिप ले ली थी । वहां बहुत से लोगों से उसकी जान पहचान हो गई थी । बहुत से नामवर लोगों को सामने से देखने और बात करने का मौका मिला था । पोश इलाके में मौजूद यह जिम खाना अपर क्लास के लिए वक्त गुज़ारी की बेहतरीन जगह थी । मुर्तज़ा भी आहिस्ता आहिस्ता उन्हीं के रंग में रंगने लगा ।




 रूहा तो रेगुलर जिम न आती थी लेकिन जिस रोज़ आ जाती वह शाम खुश गवार साबित होती । चहकती हुई रूहा उससे दुनिया जहान की बातें करती । फिर होता वह चाय या काफी पीते । अगर वक़्त तो डिनर भी कर लेते । सिकन्दर और इफरा ने उन्हें बहुत बार आउटिंग के लिए साथ

इन्वाइट किया था । वह चारों वीक एन्ड पर अब अक्सर इक्टठे पाए जाते । मुर्तजा की ज़िन्दगी एक अनोखे ही ट्रैक पर चल पड़ी थी ।




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